कोडरमा, झारखंड।
एक दर्दनाक हादसे ने झारखंड के कोडरमा जिले के मधुबन गांव को गमगीन कर दिया। गुरुवार का दिन इस गांव के लिए ऐसा तूफान बनकर आया, जो दो परिवारों की खुशियों को पल भर में तबाह कर गया। डोमचांच थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस गांव में बिजली के करंट की चपेट में आने से दो मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई।
मासूमों की पहचान
इस हादसे में जिन दो मासूमों की जान गई, उनमें एक 10 वर्षीय बालिका सरस्वती कुमारी थी, जो मैनेजर सिंह की पुत्री थी। दूसरा मासूम 3 साल का लड्डू सिंह था, जो सूरज सिंह का बेटा था। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे आपस में घुले-मिले थे और अक्सर एक-दूसरे के घर खेलते रहते थे। गुरुवार की दोपहर भी वे मैनेजर सिंह के घर में खेल रहे थे, जब यह दिल दहला देने वाला हादसा हुआ।
खेल के मैदान से सीधे मौत की गोद में
स्थानीय लोगों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, बच्चों के खेलते समय अचानक लोहे के गेट में करंट आ गया। बच्चों को यह अहसास भी नहीं हुआ कि उनके सामने जो गेट है, वह अब एक जानलेवा खतरा बन चुका है। मासूम सरस्वती और लड्डू ने जैसे ही गेट को छुआ, वे उसकी चपेट में आ गए। करंट इतना जबरदस्त था कि मौके पर ही दोनों की मौत हो गई।
चीख-पुकार और मातम
हादसे के बाद घर में कोहराम मच गया। परिजनों की चीख-पुकार ने गांव में सन्नाटा फैला दिया। मां-बाप की आँखों के तारे अब कभी वापस नहीं आने वाले थे। सरस्वती की मां बेसुध हो गईं, वहीं लड्डू के पिता सूरज सिंह ने अपने जिगर के टुकड़े को खोने का गम शब्दों में बयां नहीं किया। हर आंख नम थी, हर दिल बोझिल।
बारिश बनी जानलेवा वजह
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही थी, जिसके कारण मैनेजर सिंह के घर में बिजली की उचित अर्थिंग नहीं हो पा रही थी। इसी वजह से लोहे के दरवाजे और खिड़कियों में करंट दौड़ रहा था, लेकिन इसका अंदाजा किसी को नहीं था। यही लापरवाही अब दो मासूम जिंदगियों को लील गई।
प्रशासन और बिजली विभाग पर सवाल
घटना के बाद से स्थानीय लोग प्रशासन और बिजली विभाग पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते अर्थिंग या बिजली की सही व्यवस्था होती, तो ये हादसा टाला जा सकता था। गांव के लोगों की मांग है कि पूरे क्षेत्र में बिजली की स्थिति की जांच हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
एक गांव का टूटा भरोसा
इस हादसे ने न सिर्फ दो परिवारों को उजाड़ा, बल्कि पूरे गांव के बच्चों में डर भर दिया है। जो घर कभी बच्चों की खिलखिलाहट से गूंजता था, वहां अब सन्नाटा पसरा है। लोग अपने-अपने दरवाजों और खिड़कियों को जांच रहे हैं कि कहीं कहीं उनके घर में भी कोई खतरा तो नहीं।
बच्चों की यादें और अधूरे सपने
सरस्वती कुमारी एक होशियार छात्रा थी, जो स्कूल में हमेशा अव्वल आती थी। वह डॉक्टर बनना चाहती थी और हर दिन अपने छोटे भाई-बहनों को पढ़ाती भी थी। वहीं लड्डू सिंह तो अभी ठीक से बोलना भी नहीं सीख पाया था। उसकी शरारतें पूरे मोहल्ले की जान थीं। लेकिन अब उनके खिलौने वहीं पड़े हैं, और खेलने वाले हाथ हमेशा के लिए खामोश हो गए।
क्या कहती है पुलिस?
पुलिस ने इस मामले में प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और करंट लगने की पुष्टि हो चुकी है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी कारणों की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
यह घटना एक गहरी चेतावनी है कि बिजली से जुड़ी छोटी सी लापरवाही भी कितनी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। बच्चों की मौत सिर्फ एक व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता की एक कड़वी याद है। सरकार और आम जनता दोनों को अब और सतर्क होने की ज़रूरत है, ताकि दोबारा कोई सरस्वती या लड्डू खेलते-खेलते काल के गाल में न समा जाए।
