भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। हाल ही में हुए "ऑपरेशन सिंदूर" के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में खटास आ गई है और सीमाओं पर युद्ध जैसे माहौल की आशंका जताई जा रही है। इन हालातों के बीच सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है ताकि देश में पैनिक या अफवाहें न फैलें। खासकर मीडिया और सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को लेकर सरकार की चौकसी बेहद बढ़ गई है।
रक्षा मंत्रालय की एडवाइजरी – "लाइव कवरेज से बचें"
रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर एक अहम एडवाइजरी जारी की है, जिसमें सभी मीडिया चैनलों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और आम नागरिकों को सेना की मूवमेंट या कार्रवाई की लाइव रिपोर्टिंग से दूर रहने को कहा गया है। मंत्रालय का साफ कहना है कि ऐसी रिपोर्टिंग से न केवल ऑपरेशन की सफलता प्रभावित हो सकती है, बल्कि हमारे जवानों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
सरकार ने इस संदर्भ में कारगिल युद्ध, 26/11 मुंबई हमले और कंधार विमान अपहरण जैसे उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि लाइव रिपोर्टिंग से दुश्मन को फायद मिलता है और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई बाधित होती है। सरकार ने कहा है कि वार रिपोर्टिंग गलत नहीं है, लेकिन लाइव कमेंट्री उचित नहीं मानी जा सकती।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भी सुपर एक्टिव
भारत सरकार का सूचना और प्रसारण मंत्रालय इस पूरे मामले में लगातार एक्टिव है। बीते एक हफ्ते में कई एडवाइजरी और निर्देश जारी किए गए हैं। पाकिस्तान से जुड़ी खबरों या कंटेंट को लेकर मीडिया को संयमित और जिम्मेदार रिपोर्टिंग करने की सलाह दी गई है। खासतौर पर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर सरकार की पैनी नजर है।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली PIB (प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो) फैक्ट चेक यूनिट इन दिनों 24x7 मोड में काम कर रही है। यह यूनिट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही झूठी खबरों की जांच करती है और उनका खंडन जारी करती है।
अफवाहों का त्वरित खंडन – PIB फैक्ट चेक का एक्शन
सरकार की फैक्ट चेक यूनिट ने हाल के दिनों में कई झूठी खबरों का पर्दाफाश किया है:
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ड्रोन हमले का फर्जी वीडियो: जालंधर में एक खेत में लगी आग के वीडियो को ड्रोन हमला बताया गया।
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भारतीय चौकी को तबाह करने का दावा: एक नकली वीडियो में 20 राज बटालियन की बात कही गई, जबकि ऐसा कोई यूनिट ही नहीं है।
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बेरूत विस्फोट को भारत पर मिसाइल हमला बताया गया: 2020 का एक पुराना वीडियो गलत दावे के साथ शेयर किया गया।
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राजौरी आत्मघाती हमले की अफवाह: ऐसा कोई हमला हुआ ही नहीं था, PIB ने इसे तुरंत गलत बताया।
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फर्जी लेटर और नकली सेनाध्यक्ष: एक नकली पत्र वायरल किया गया जिसमें सेनाध्यक्ष का नाम भी फर्जी था।
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हवाई अड्डों में एंट्री बैन की अफवाह: सोशल मीडिया पर झूठ फैलाया गया कि एयरपोर्ट्स में आम नागरिकों का प्रवेश बंद है, जबकि ऐसा कोई आदेश सरकार ने जारी नहीं किया।
कंट्रोल रूम और निगरानी एजेंसियां लगातार एक्टिव
PIB की फैक्ट चेक यूनिट, EMMC (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर), और न्यू मीडिया विंग जैसी संस्थाएं आपस में समन्वय बनाकर लगातार मीडिया मॉनिटरिंग कर रही हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन जैसी सरकारी एजेंसियां भी इस कार्य में लगी हैं। इन सभी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भ्रामक, संवेदनशील या राष्ट्र विरोधी कंटेंट प्रसारित न हो।
पाकिस्तान की ओर से सोशल मीडिया प्रोपेगंडा
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से एक सुसंगठित सोशल मीडिया फेक न्यूज तंत्र भारत के खिलाफ झूठ फैलाने में जुटा है। सरकार की टीम इस प्रोपेगंडा का रियल टाइम में जवाब दे रही है और फेक कंटेंट का त्वरित खंडन किया जा रहा है।
नागरिकों से अपील – "जिम्मेदारी से व्यवहार करें"
सरकार ने मीडिया और आम जनता से अपील की है कि वे राष्ट्रहित और देश की सुरक्षा को सर्वोपरि रखें। खबरों की सत्यता की पुष्टि अधिकृत स्रोतों जैसे PIB, रक्षा मंत्रालय या सूचना प्रसारण मंत्रालय से करें। किसी भी अफवाह या अनधिकृत जानकारी को आगे न बढ़ाएं।
निष्कर्ष:
ऐसे संवेदनशील समय में हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह अफवाहों से बचे और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही किसी भी जानकारी को बिना जांचे शेयर न करें और केवल अधिकृत स्रोतों पर भरोसा करें। देश की सुरक्षा और जवानों की हिफाजत के लिए हमारा सहयोग भी जरूरी है।
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