भोपाल।
मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण विकास की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि गांवों में रहने वाले नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं मिले और पंचायतें आत्मनिर्भर बनें। इसी क्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने शुक्रवार को बालाघाट जिले के भरवेली ग्राम पंचायत में एक अहम घोषणा की। उन्होंने बताया कि जिन ग्राम पंचायतों की आबादी 5000 से अधिक है, वहां दो सामुदायिक भवन बनाए जाएंगे।
भरवेली में 64 लाख की लागत से बना पंचायत भवन
मंत्री श्री पटेल 64 लाख रुपये की लागत से निर्मित नए पंचायत भवन के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे। यह भवन आधुनिक सुविधाओं से युक्त है और ग्रामीणों को पंचायत से जुड़ी सभी सेवाएं अब एक ही छत के नीचे मिलेंगी। इस मौके पर उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और समाजसेविका माता सावित्रीबाई फुले की प्रतिमाओं का अनावरण भी किया। इसके अलावा विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत ग्रामीणों को लाभ भी वितरित किए गए।
मंत्री ने कहा कि यह दिन भरवेली के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि इस पंचायत भवन के माध्यम से न केवल गांव के विकास को बल मिलेगा बल्कि यह लोगों के लिए एक प्रेरणा का केंद्र भी बनेगा।
बिना भवन की नहीं रहेगी कोई पंचायत
मंत्री प्रहलाद पटेल ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में प्रदेश की कोई भी ग्राम पंचायत बिना भवन के नहीं रहेगी। प्रदेश सरकार चरणबद्ध तरीके से पंचायत भवन और सामुदायिक भवनों का निर्माण करवा रही है। इससे पंचायतों को कार्य करने में सुविधा होगी और ग्रामीणों को समय पर सेवाएं मिल सकेंगी।
विशेष रूप से, जिन पंचायतों की आबादी 5000 से अधिक है, वहां पर दो सामुदायिक भवन बनाना सुनिश्चित किया गया है। भरवेली ग्राम को भी इसका लाभ मिलेगा।
क्लस्टर पंचायतों में उपयंत्री कार्यालय भी बनेगा
मंत्री ने यह भी कहा कि 10 से 12 पंचायतों के समूह (क्लस्टर) में उपयंत्री कार्यालय खोले जाएंगे। इससे ग्रामीण विकास कार्यों की मॉनिटरिंग और निगरानी और बेहतर तरीके से हो सकेगी।
जल गंगा संवर्धन अभियान में बालाघाट की सराहना
मंत्री पटेल ने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बालाघाट जिले को प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त करने पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिले ने जल संरक्षण में सराहनीय कार्य किया है।
पौधारोपण और “एक बगिया मां के नाम” अभियान की घोषणा
उन्होंने आगे बताया कि 15 जुलाई से 15 अगस्त तक प्रदेश में पौधारोपण अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान केवल उन जगहों पर पौधे लगाए जाएंगे जहां उनकी सुरक्षा, पानी और फेंसिंग की समुचित व्यवस्था होगी। पौधों के जीवित रहने की गारंटी भी तय की गई है।
इसके बाद, 15 अगस्त से 15 सितंबर तक “एक बगिया मां के नाम” अभियान शुरू होगा। इस अभियान में महिला स्व-सहायता समूह भाग लेंगे, जिनके पास एक एकड़ जमीन उपलब्ध है। ऐसे समूहों को फलों के पौधे लगाने के लिए सरकार प्रोत्साहन राशि देगी:
- पहले वर्ष ₹2 लाख,
- दूसरे वर्ष ₹52 हजार,
- और तीसरे वर्ष ₹48 हजार,
- जो उनकी कार्य प्रगति के आधार पर दी जाएगी।
सरकार की प्राथमिकता – ग्रामीण आत्मनिर्भरता
मंत्री पटेल ने अपने संबोधन में यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। हर ग्राम पंचायत में अब बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है, ताकि गांवों के विकास में कोई कमी न रहे।
उन्होंने यह भी दोहराया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जिन योजनाओं की नींव रखी थी, जैसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, वह आज भी गांवों को जोड़ने में सफल हो रही है। वहीं, सावित्रीबाई फुले के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी वजह से महिलाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की शुरुआत हुई थी।
निष्कर्ष:
मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में जुटी हुई है। पंचायत भवनों, सामुदायिक केंद्रों, पौधारोपण अभियानों और महिला समूहों के लिए चल रही योजनाओं से यह स्पष्ट है कि सरकार ग्राम स्वराज की दिशा में सार्थक कदम उठा रही है।
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